ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी नई ताकत, ANM के सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण की शुरुआत
- एएनएम को मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण
- एसबीआई फाउंडेशन एवं हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट की ‘एसबीआईएफ जीवनम् परियोजना’ का शुभारंभ
- उत्तराखण्ड में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
डोईवाला: उत्तराखण्ड में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने तथा ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट (एचआईएचटी) ने एसबीआई फाउंडेशन व राज्य स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से ‘एसबीआईएफ जीवनम् परियोजना’ का शुभारंभ किया। परियोजना के अंतर्गत राज्यभर की सहायक नर्स एवं मिडवाइफ (एएनएम) को सिमुलेशन आधारित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
संस्थान के आदि कैलाश सभागार में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि उत्तराखण्ड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने एचआईएचटी की अध्यक्षीय समिति के सदस्य डॉ. विजय धस्माना व एसबीआई के उप-महाप्रबंधक राजीव रंजन के साथ परियोजना की प्रशिक्षण पुस्तिका का लोकार्पण कर परियोजना का औपचारिक शुभारंभ किया।
‘एएनएम हैं ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला’
मुख्य अतिथि स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि एएनएम ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की आधारशिला हैं। उनकी दक्षता और व्यावहारिक कौशल में वृद्धि से मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार संभव है। उन्होंने एसबीआई फाउंडेशन एवं हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह परियोजना राज्य में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा प्रदान करेगी। राज्य स्वास्थ्य विभाग इसमें पूर्ण सहयोग करेगा।
एसबीआई फाउंडेशन ने दिया सहयोग
कार्यक्रम के दौरान एसबीआई के उप महाप्रबंधक राजीव रंजन तथा एसबीआई फाउंडेशन की सहायक प्रबंधक ईशा अग्रवाल ने परियोजना सहायता राशि का चेक एचआईएचटी की अध्यक्षीय समिति के सदस्य डॉ. विजय धस्माना को प्रदान किया। राजीव रंजन ने कहा कि एसबीआई फाउंडेशन सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत स्वास्थ्य एवं जनकल्याण से जुड़ी पहलों को निरंतर सहयोग देता रहेगा।
समाज सेवा के लिए प्रतिबद्ध है संस्थान : डॉ. विजय धस्माना
एचआईएचटी की अध्यक्षीय समिति के सदस्य डॉ. विजय धस्माना ने एसबीआई फाउंडेशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थान नवाचार, अनुसंधान एवं क्षमता विकास के माध्यम से समाज की सेवा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहा है। डॉ.धस्माना ने कहा कि यह परियोजना राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उत्तराखण्ड की 2,000 से अधिक एएनएम को मिलेगा प्रशिक्षण
ग्रामीण विकास संस्थान (आरडीआई) के उप निदेशक डॉ. राजीव बिजल्वाण ने बताया कि इस परियोजा के अंतर्गत उत्तराखंड में कार्यरत 2,000 से अधिक एएनएम को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण में सिमुलेशन आधारित शिक्षण पद्धति के माध्यम से सुरक्षित प्रसव, उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान, नवजात पुनर्जीवन प्रसवोत्तर देखभाल, आपातकालीन मातृ एवं नवजात प्रबंधन तथा समय पर रेफरल जैसी महत्वपूर्ण दक्षताओं का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में ग्रामीण विकास संस्थान (आरडीआई) के उप निदेशक नितेश कौशिक ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गरिमा कपूर ने किया। इस अवसर पर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल, प्रति-कुलपति डॉ. अशोक देवराड़ी सहित विश्वविद्यालय एवं संस्थान के वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सक तथा गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
क्यों जरूरी है यह परियोजना ?
उत्तराखण्ड का दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र, बिखरी हुई आबादी तथा सीमित परिवहन सुविधाएँ समय पर मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने में बड़ी चुनौती हैं। राज्य में नवजात मृत्यु दर (एनएमआर) 19 से घटकर 15 तथा शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) 24 से घटकर 21 हो गई है, लेकिन मातृ मृत्यु अनुपात (एमएमआर) अभी भी लगभग 100 प्रति एक लाख जीवित जन्म है।
स्वास्थ्य मंत्री ने सिमुलेशन एवं एआर-वीआर लैब का किया निरीक्षण
इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने हिमालयन इंस्टीट्यूट हॉस्पिटल ट्रस्ट की सिमुलेशन लैब एवं एआर-वीआर लैब का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं, सिमुलेशन आधारित शिक्षण प्रणाली तथा स्वास्थ्यकर्मियों के कौशल विकास के लिए विकसित अत्याधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई।