मोहब्बेवाला में ट्रक ‘ब्रेक फेल’ का रोज़गार: प्रशासन की नींद इतनी गहरी कि हादसे भी जगाने में नाकाम!
मोहब्बेवाला में फिर ट्रक का कहर,6 महीनों में 11वां हादसा, स्थानीय लोग कब तक जिएंगे मौत के साए में ?
देहरादून के मोहब्बेवाला चौक पर फिर वही पुराना ‘ट्रक-ड्रामा’ दोहराया गया। सुबह करीब 07 बजे आशारोड़ी की तरफ से आ रहा मालवाहक ट्रक अनियंत्रित होकर हादसे का शिकार हो गया। इस से पहले 16 अप्रैल आशारोड़ी से आ रहा मालवाहक ट्रक ‘ब्रेक फेल’ का अभिनय करता हुआ पहले दूसरे ट्रक से टकराया, फिर ऑटो को कुचला और अंत में एमडीडीए के स्वागत बोर्ड को ‘धन्यवाद’ देते हुए पेड़ से जा लगा। छह गाड़ियाँ चकनाचूर, दो लोग घायल। लेकिन चिंता की कोई बात नहीं-यह तो मोहब्बेवाला का ग्यारहवां हादसा है सिर्फ पिछले छह महीनों में। प्रशासन के लिए तो यह रोज़मर्रा का ‘ट्रैफिक शो’ बन चुका है।
स्थानीय लोग अब मौत के साथ ‘फैमिली एडजस्टमेंट’ कर चुके हैं। सुबह बच्चे स्कूल जाते वक्त, महिलाएं सब्जी बाजार जाती वक्त और युवा ऑफिस की तरफ निकलते वक्त मन-ही-मन प्रार्थना करते हैं, ‘भगवान, आज किसी और की बारी हो’। एक्सप्रेसवे खुल गया तो ट्रक वाले भाईयों को जैसे रेसिंग ट्रैक मिल गया हो। ढलान है, स्पीड है, ओवरलोडिंग है, ड्राइवर थका हुआ है, टायर पुराना है-फिर भी ‘भाई, फुल स्पीड में चलो, ब्रेक बाद में लगाना’।
फरवरी में ट्रक पलटकर आग लगने वाली थी, दिसंबर में छह गाड़ियों को रौंद डाला, मार्च में टायर फटने का तमाशा हुआ, फिर भी ट्रांसपोर्ट विभाग और पुलिस वाले बड़े आराम से बैठे हैं। उनका रवैया है, ‘हादसा हो गया? अरे, रिपोर्ट लिख दो, समिति बना दो, आश्वासन दे दो। अगला हादसा आने तक छुट्टी मनाओ’।
सबसे शानदार बात यह कि मोहब्बेवाला को ‘ब्लैक स्पॉट’ घोषित करने तक की फुरसत नहीं मिली अभी तक। स्पीड ब्रेकर लगाना? बैरियर बनवाना? साइन बोर्ड? स्पीड कैमरा? भारी वाहनों पर रात-दिन प्रतिबंध? अरे महाशय, ये सब तो ‘विकास’ की राह में रुकावट हैं! यहां तो सिर्फ हादसे और ‘जांच का आश्वासन’ का विकास हो रहा है।
मोहब्बेवाला के लोग समझ गए हैं कि उनकी जान सरकारी फाइलों से भी सस्ती है। कभी भी एक बड़ा हादसा हो सकता है, किसी परिवार का चिराग बुझ सकता है, बच्चे अनाथ हो सकते हैं, लेकिन तब शायद कोई मंत्री जी ‘गहरी चिंता’ व्यक्त करेंगे, एक और समिति बनाएंगे और फोटो खिंचवाकर ‘सुरक्षा पर जोर’ का बयान देंगे।
प्रशासन अगर अभी भी ‘सो रहे हैं’ का नाटक करता रहा तो याद रखिए-अगला हादसा सिर्फ आंकड़ा या खबर नहीं बनेगा, बल्कि आपके लापरवाह, आंखें मूंदे बैठे सिस्टम का ‘लाइव प्रमाण-पत्र’ बनेगा।