- सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित करने के मामले में नगर कोतवाली में केस दर्ज, चार धाराओं में कार्रवाई
देहरादून: अंकिता भंडारी प्रकरण को लेकर चर्चा में आईं अभिनेत्री उर्मिला सनावर की कानूनी मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। देहरादून की नगर कोतवाली में सोशल मीडिया पर एक वीडियो प्रसारित करने के मामले में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायत के मुताबिक, वीडियो में राज्यपाल, भाजपा के एक वरिष्ठ नेता और एक महिला को लेकर कथित आपत्तिजनक एवं मानहानिकारक आरोप लगाए गए हैं। मामले में उर्मिला सनावर के साथ एक अज्ञात व्यक्ति को भी आरोपी बनाया गया है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को लेकर शिकायत
पुलिस के अनुसार, मोती बाजार निवासी सागर ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता ने बताया कि हरिद्वार रोड स्थित सीबीआई कोर्ट के बाहर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। आरोप है कि वीडियो में उर्मिला सनावर मीडिया के सामने संबंधित व्यक्तियों को लेकर व्यक्तिगत आरोप लगा रही हैं, जिनके समर्थन में कोई न्यायिक आदेश या प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है।
शिकायत में यह भी आशंका जताई गई है कि इस तरह के आरोपों से संबंधित व्यक्तियों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है और सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
BNS की चार धाराओं में मुकदमा
पुलिस के मुताबिक, मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 79, 352, 353 और 356 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। प्रकरण की जांच निरीक्षक राकेश रावत को सौंपी गई है। पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों और सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो की जांच कर रही है।
पहले से दर्ज मामले में जेल में हैं उर्मिला
इससे पहले 25 अक्टूबर को हरिद्वार पुलिस ने उर्मिला सनावर को सहारनपुर से गिरफ्तार किया था। उन्हें रानीपुर थाने में दर्ज एक अन्य मामले में अदालत में पेश किया गया, जहां से 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
यह मामला ज्वालापुर के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की बेटी की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में सोशल मीडिया पर कथित अश्लील और मानहानिकारक टिप्पणियां करने के आरोप लगाए गए थे।
रिपोर्ट के अनुसार, उर्मिला सनावर के खिलाफ अब तक करीब 11 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, विभिन्न मामलों में लगाए गए आरोपों की सत्यता का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
