- दूसरे चरण की सुनवाई में कई आपत्तियां और सुझाव दर्ज
- शहर के सुनियोजित विकास के लिए नागरिकों, सामाजिक संगठनों और कॉलोनीवासियों ने रखे अहम प्रस्ताव
देहरादून: राजधानी देहरादून के भविष्य और सुनियोजित विकास की रूपरेखा तय करने वाली ‘देहरादून महायोजना-2041 (प्रारूप)’ को अधिक व्यावहारिक, समावेशी और जनोन्मुख बनाने के लिए मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) द्वारा चलाए जा रहे जनसुनवाई अभियान को भारी जनसमर्थन मिल रहा है। उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी के निर्देशों पर प्राधिकरण कार्यालय में शुरू की गई दूसरे चरण की सुनवाई के दूसरे दिन बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, सामाजिक संगठन, कॉलोनी वेलफेयर एसोसिएशंस, व्यापारिक प्रतिनिधि और जनप्रतिनिधि पहुंचे। इस दौरान शहर के भविष्य से जुड़ी विभिन्न समस्याओं और आवश्यकताओं पर नागरिकों ने अपने सुझाव एवं आपत्तियां दर्ज कराईं।
सुनवाई के दूसरे दिन कुल 28 आपत्तियां और सुझाव प्राप्त हुए, जिनमें सड़क नेटवर्क, ट्रैफिक प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, ड्रेनेज (जल निकासी), हरित क्षेत्रों के संरक्षण और आवासीय-व्यावसायिक भू-उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषय प्रमुख रहे। प्राधिकरण अधिकारियों का कहना है कि यह महायोजना केवल शहरी विकास का दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में देहरादून की विकास यात्रा का एक व्यापक रोडमैप है। इसीलिए इसे अंतिम रूप देने से पहले प्रत्येक नागरिक की राय को गंभीरता से लिया जा रहा है। पहले चरण की सेक्टरवार सुनवाई के बाद यह दूसरा चरण इसीलिए आयोजित किया गया है ताकि कोई भी नागरिक अपनी बात रखने से वंचित न रहे।

“जनसहभागिता ही महायोजना की सबसे बड़ी ताकत” : बंशीधर तिवारी
जनसुनवाई के इस महत्व पर जोर देते हुए एमडीडीए के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि जनता की सहभागिता ही इस महायोजना की सबसे बड़ी ताकत है। प्राधिकरण का उद्देश्य केवल विकास का खाका खींचना नहीं, बल्कि ऐसा विजन डॉक्यूमेंट तैयार करना है जो वर्तमान जरूरतों के साथ भविष्य की चुनौतियों का भी समाधान कर सके। प्राप्त सभी सुझावों का तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा गंभीरता से परीक्षण किया जाएगा और जो भी सुझाव व्यावहारिक, नियमानुकूल और जनहित में होंगे, उन्हें महायोजना के अंतिम प्रारूप में समाहित किया जाएगा।
वहीं एमडीडीए के सचिव मोहन सिंह बर्निया ने बताया कि दूसरे चरण की सुनवाई में नागरिकों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। सभी प्राप्त आपत्तियों और सुझावों को पारदर्शी प्रक्रिया के तहत दर्ज किया जा रहा है। विशेषज्ञों की समिति द्वारा प्रत्येक सुझाव का गहन तकनीकी परीक्षण किया जाएगा ताकि देहरादून महायोजना-2041 गुणवत्तापूर्ण और आदर्श शहरी नियोजन का एक सशक्त माध्यम बन सके। एमडीडीए का अंतिम लक्ष्य देहरादून को सुव्यवस्थित, पर्यावरण-अनुकूल और आधुनिक सुविधाओं से लैस शहर के रूप में विकसित करना है।

